
एक सपना था कुछ तरंगे थी
मेरी भी कुछ अभिलाषा थी
तब तुम मुझे मिले
जब चारो ओर निराशा थी
तुमने मुझे चलना सिखाया
लरना सिखाया मुस्कुराना सिखाया
मेरे जीवन पथ में तुने फूलों का सेज सजाया
कभी तुने मुझे संभाला कभी मैंने तेरा साथ निभाया
कारवां यह ज़िन्दगी का युहीं चलता रहा
हमारी कहानी को ऊपर वाला नित रोज गढ़ता गया
कभी उसने दर्द भरे तो कभी ख़ुशी
कभी दी जीत तो कभी मायूसी
पर उस कहानी के हर मोर पर तुने मेरा साथ निभाया
मैं बहुत खुशनसीब हूँ जो तेरे जैसा दोस्त पाया
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